सिर्फ लग्न कुंडली देख कर ही जवाब नही देना चाहिए।....
सिर्फ लग्न कुंडली देख कर ही जवाब नही देना चाहिए।....🌼🌼
लग्न कुंडली कितनी भी मजबूत दिखाई दे लेकिन इसकी मजबूती वास्तव में कितनी है वो वर्ग चार्ट से ही पता चलेगा, क्यो की वर्ग चार्ट जो होतें है वो लग्न कुंडली की स्ट्रेंथ को वेरिफाई करते है, कोई ग्रह अगर लग्न कुंडली मे मित्र की राशि मे और अच्छे भाव मे बैठा है लेकिन नवमांश में शत्रु राशि मे या खराब भाव मे बैठा है तो
जो उम्मीद आप ने की है उस ग्रह से वो उस उम्मीद पे खरा नही उतरेगा. और दूसरी तरफ अगर लग्न कुंडली मे 8th भाव का स्वामी अगर कमजोर स्थिति में है लेकिन वही नवमांश में वो मजबूत स्थिति में नजर आरहा है तो आप के 8th भाव को बल मिलेगा जो आप की आयु के लिए तो ठीक है बाकी आप जानते ही है। पुष्कर नवमांश भी नवमांश कुंडली से पता चल जाएगा।
वर्गोत्तमी का भी पता नवमांश से चलेगा, वैवाहिक जीवन के लिए लग्न कुंडली का सप्तम भाव और नवमांश कुंडली दोनो को देखना जरूरी है, भाग्य के लिए भी नवमांश देंखना जरूरी है।
कर्म भाव और कर्मेश की मजबूती के लिए दशमांश वर्ग चार्ट भी देंखना जरूरी है। वो अलग बात है कि कर्म के लिए शनि को भी देंखना जरूरी है, इसी प्रकार हर वर्ग कुंडली का अपने आप मे बहुत महत्त्व है। अब ऐसा मानलीजिए की लग्न कुंडली हमारा शरीर है और बाकी वर्ग कुंडलिया हमारे शरीर के अंदर के पार्ट है जैसे लिवर, किडनी आदि , हमारा शरीर बाहर से कितना भी स्ट्रांग नजर आए लेकिन कही लिवर या किडनी डेमेज हो गई तो वो शरीर किसी काम का नही है। अगर लग्न कुंडली कमजोर है लेकिन वर्ग कुंडलिया अगर मजबूत है तो व्यक्ति पीछे मुड़कर नही देखता। आप ने ऐसे बहुत से लोग देंखे होंगे कि उनकी कुंडली मे 3 या 4 ग्रह नीच राशि मे है शत्रु राशि मे है 6,8,12 में है लेकिन फिरभी को उन्नति के शिखर पे है सब कुछ अच्छा चल रहा है उनकी लाइफ में ऐसा क्यो - क्यो की जो ग्रह लग्न में कमजोर है वो नवमांश और अन्य वर्ग कुंडली मे स्ट्रॉग है,
अब हम नवमांश कुंडली से भी फलित करते है आप ने एक पद्धति का नाम सुना होगा //राशि तुल्य नवांश // ये नवमांश कुंडली से फलादेश करने की ही पद्दति है।
आज इतना ही शेष अगली पोस्ट में
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